13 अप्रैल को दिया था आवेदन, छह माह बाद भी नहीं हुआ सीमांकन; राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल
"चंद्र प्रकाश साहू"
सुरजपुर/ रामानुजनगर। पैतृक जमीन के सीमांकन के लिए एक महिला करीब छह माह से तहसील कार्यालय के चक्कर काट रही है, लेकिन अब तक सीमांकन की प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी है। इधर, विवादित भूमि से लगी जमीन पर पक्का निर्माण तेजी से किए जाने का आरोप है। निर्माण रोकने के लिए तहसील कार्यालय में स्थगन आवेदन दिए जाने के बावजूद आज दिनांक तक कोई स्थगन आदेश जारी नहीं होने से राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
मामला ग्राम रामानुजनगर की निवासी दिव्या तांजे, आ. स्व. सुदर्शन राम तांजे की पैतृक भूमि खसरा नंबर 357/1 से जुड़ा बताया जा रहा है। आवेदिका के अनुसार इससे लगी भूमि खसरा नंबर 359 कृष्णा त्रिपाठी के नाम है और आरोप है कि उक्त भूमि पर कराया जा रहा पक्का निर्माण उनकी पैतृक भूमि को प्रभावित कर सकता है। दिव्या ने बताया कि उन्होंने 13 अप्रैल 2026 को भूमि सीमांकन के लिए तहसील कार्यालय में आवेदन प्रस्तुत किया था, लेकिन करीब छह माह गुजरने के बावजूद सीमांकन की कार्रवाई पूरी नहीं हुई। इसी बीच जब संबंधित भूमि पर निर्माण कार्य शुरू हुआ तो विवाद और गंभीर हो गया।
आवेदिका ने 25 सितंबर को निर्माण रोकने के लिए तहसील कार्यालय में स्थगन आवेदन दिया। उनका कहना है कि 26 सितंबर को वह दोपहर करीब 3 बजे से रात 8 बजे तक तहसील कार्यालय में मौजूद रहीं, लेकिन स्थगन आदेश जारी नहीं किया गया। इसके बाद 27 सितंबर को भूमि की नाप-जोख किए जाने की जानकारी मिली, जिस पर आवेदिका ने यह भी सवाल उठाया कि उन्हें नाप-जोख की पूर्व सूचना क्यों नहीं दी गई।
मामले को लेकर 29 सितंबर को एसडीएम रामानुजनगर के समक्ष भी आवेदन देकर कार्रवाई की मांग की गई। आवेदिका के अनुसार एसडीएम कार्यालय से उन्हें बताया गया कि भूमि की नाप-जोख हो चुकी है तथा भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 164 के तहत आवेदन प्रस्तुत करने की बात कही गई। पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब 13 अप्रैल से सीमांकन का आवेदन लंबित था, तो अब तक उसकी प्रक्रिया पूरी क्यों नहीं हुई और निर्माण शुरू होने के बाद कार्रवाई क्यों तेज हुई। वहीं, निर्माण रोकने के लिए आवेदन दिए जाने के बावजूद स्थगन आदेश पर निर्णय नहीं होने से भी प्रशासन की भूमिका सवालों के घेरे में है।
हालांकि भूमि की वास्तविक सीमा और दोनों पक्षों के अधिकार का अंतिम निर्धारण राजस्व अभिलेखों तथा विधिवत सीमांकन के आधार पर ही किया जा सकता है। ऐसे में जरूरत इस बात की है कि राजस्व विभाग पूरे मामले की निष्पक्ष जांच करते हुए सीमांकन की स्थिति स्पष्ट करे और लंबित आवेदन तथा निर्माण संबंधी शिकायत पर नियमानुसार समयबद्ध कार्रवाई करे, ताकि विवाद बढ़ने से पहले स्थिति साफ हो सके।