सूरजपुर। जिले के भैयाथान तहसील क्षेत्र में संचालित प्रकाश इंडस्ट्रीज लिमिटेड भास्कर पारा के ओपन कोल माइंस को लेकर एक बार फिर ग्रामीणों का गुस्सा खुलकर सामने आया है। दोपहर के समय ग्राम कुसमुसी और कुर्रिडीह सहित आस पास के गांवों से बड़ी संख्या में किसान बीते दिनों एसडीएम कार्यालय भैयाथान पहुंचे और वहां जमकर हल्ला मचाया है। स्थिति उस समय और तनावपूर्ण हो गई जब नोटिस देकर बुलाए गए किसानों को संबंधित अनुभागीय अधिकारी कार्यालय में मौजूद नहीं मिले। बाद में तहसीलदार के पहुंचने पर किसी तरह मामला शांत कराया गया।

बताया जा रहा है कि एसडीएम कार्यालय द्वारा कुसमुसी और कुर्रिडीह के लगभग 165 किसानों को नोटिस जारी कर बुलाया गया था। लेकिन तय समय पर अधिकारी के अनुपस्थित रहने से किसानों में भारी नाराजगी फैल गई। ग्रामीणों का कहना है कि यह पहली बार नहीं है, बल्कि तीन बार उन्हें इसी तरह बुलाकर वापस भेज दिया गया है, जिससे उनका समय और आर्थिक नुकसान दोनों हो रहा है। किसानों ने सवाल उठाया कि जब अधिकारी मौजूद ही नहीं रहते, तो उन्हें बार-बार क्यों बुलाया जाता है।

प्रदर्शन कर रहे किसानों ने आरोप लगाया कि प्रकाश इंडस्ट्रीज लिमिटेड द्वारा ओपन कोल माइंस के लिए उनकी जमीनें कम कीमत पर लेने का दबाव बनाया जा रहा है। कई किसानों ने यह भी कहा कि उनसे जबरन हस्ताक्षर कराए गए, लेकिन किसी प्रकार की रसीद या पावती तक नहीं दी गई। इससे शासन और कंपनी के बीच मिलीभगत की आशंका और गहरी हो गई है। ग्रामीणों का कहना है कि वे मजबूरी में अपनी जमीन देने को तैयार हो रहे हैं, लेकिन इसके बदले उन्हें उचित मुआवजा और पारदर्शी प्रक्रिया की जानकारी तक नहीं दी जा रही है।


ग्रामीणों ने यह भी स्पष्ट किया कि कुसमुसी और कुर्रिडीह क्षेत्र अनुसूचित क्षेत्र में आता है, जहां ग्राम सभा की सहमति सर्वोपरि होती है। उनका कहना है कि यदि उनकी बात नहीं सुनी गई तो वे उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होंगे। किसानों ने यह भी कहा कि “जनता से बड़ा कोई नहीं होता, न लोकसभा और न ही विधानसभा, सबसे बड़ा अधिकार ग्राम सभा का है।”

मामले में एक और बड़ा तथ्य यह सामने आया कि प्रारंभ में यह ओपन कोल माइंस ग्राम बड़सरा में प्रस्तावित था, लेकिन वहां के ग्रामीणों के कड़े विरोध और आंदोलनों के बाद इसे भास्कर पारा में स्थानांतरित किया गया। अब यहां भी स्थानीय लोगों में असंतोष तेजी से बढ़ रहा है।

ग्रामीणों का आरोप है कि माइंस शुरू होने से पहले कंपनी द्वारा कई वादे किए गए थे, जिनमें स्थानीय युवाओं को रोजगार, क्षेत्र में बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं, सड़क, पेयजल, स्कूल और अन्य बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने की बात कही गई थी। लेकिन जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल उलट दिखाई दे रही है। ग्रामीणों का कहना है कि न तो उन्हें रोजगार मिला और न ही क्षेत्र में कोई ठोस विकास कार्य दिख रहा है।

स्थानीय लोगों के अनुसार माइंस क्षेत्र में आज भी स्वास्थ्य सुविधाओं का अभाव है, बच्चों के लिए स्कूल की व्यवस्था नहीं की गई है, सड़क में डस्ट फैला हुआ है। सड़कें भी अपेक्षित स्तर पर नहीं हैं। इससे लोगों में यह भावना गहराती जा रही है कि माइंस केवल संसाधनों का दोहन कर रही है, जबकि स्थानीय जनता को उसका कोई वास्तविक लाभ नहीं मिल रहा।

ग्रामीणों ने प्रशासन पर भी गंभीर आरोप लगाए हैं कि वह कंपनी के साथ मिलकर आम लोगों को गुमराह कर रहा है और उनकी समस्याओं को नजरअंदाज कर रहा है। किसानों का कहना है कि अगर जल्द ही उनकी समस्याओं का समाधान नहीं किया गया, अधिकार सुनिश्चित नहीं किए गए, तो वे बड़े स्तर पर आंदोलन करने की सुगबुगाहट तेज हो गई है।