सूरजपुर। जिले के रामानुजनगर तहसील अंतर्गत देवनगर उप तहसील कार्यालय इन दिनों अव्यवस्था और अनदेखी का उदाहरण बन गया है। करीब 30 गांवों की जनता इसी कार्यालय पर निर्भर है, लेकिन यहां मूलभूत सुविधाओं का अभाव अब गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। भीषण गर्मी के बीच कार्यालय परिसर में पीने के पानी तक की व्यवस्था नहीं है, जिससे दूर-दराज से आने वाले ग्रामीणों को मजबूरी में बाहर से बोतलबंद पानी खरीदना पड़ रहा है।
भूमि संबंधी कार्यों के लिए रोजाना सैकड़ों ग्रामीण घंटों लंबी कतारों में खड़े रहने को मजबूर हैं। इसके बावजूद उनके छोटे-छोटे काम महीनों तक लंबित रखे जा रहे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि नायब तहसीलदार सरिता राजवाड़े का व्यवहार आम लोगों के प्रति बेहद कठोर और असंवेदनशील है। कई लोगों ने बताया कि जिनके साथ वकील होते हैं, उनके काम प्राथमिकता से किए जाते हैं, जबकि सामान्य ग्रामीणों को बार-बार चक्कर कटवाए जा रहे हैं।
स्थल पर की गई पड़ताल में कार्यालय के भीतर अव्यवस्था का आलम साफ नजर आया। न तो पेयजल की सुविधा, न बैठने की समुचित व्यवस्था और न ही कार्य निष्पादन की कोई पारदर्शी प्रक्रिया इन हालातों में आम जनता खुद को उपेक्षित महसूस कर रही है।
इस पूरे मामले को लेकर हमर उत्थान सेवा समिति ने कड़ी आपत्ति दर्ज कराई है। समिति का कहना है कि लोकसेवकों का रवैया जनसेवा के बजाय सत्ता प्रदर्शन जैसा हो गया है। एक ओर सरकार सुशासन और जनसुविधाओं के दावे करती है, वहीं दूसरी ओर तहसील स्तर पर इस तरह की लापरवाही व्यवस्था की सच्चाई उजागर कर रही है।
गौरतलब है कि भीषण गर्मी में दूर से आए लोगों को पानी जैसी बुनियादी सुविधा तक न मिलना न केवल प्रशासनिक विफलता है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं पर भी प्रश्नचिह्न है। अब देखना यह होगा कि जिम्मेदार अधिकारी इस गंभीर मामले पर कब तक चुप्पी साधे रहते हैं या फिर कोई ठोस कदम उठाया जाता है।