सूरजपुर। जिले के प्रेमनगर नगर पंचायत में कराए गए विकास कार्य अब सवालों के घेरे में आ गए हैं। क्षेत्र में सड़क, नाली, मरम्मत, पौधारोपण सहित विभिन्न कार्य तो कराए गए हैं, लेकिन इन सभी कार्यों के स्थलों पर अनिवार्य सूचना पटल (इन्फॉर्मेशन बोर्ड) पूरी तरह से नदारद हैं। इससे आम जनता यह जानने से वंचित है कि उनके टैक्स के पैसे से कौन-कौन से कार्य हुए, उनकी लागत क्या थी और कार्य किस मानक के अनुसार कराया गया।
नियमों के अनुसार प्रत्येक निर्माण कार्य स्थल पर उसकी स्वीकृत राशि, लंबाई, चौड़ाई, कार्य एजेंसी और योजना का विवरण सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित करना अनिवार्य होता है, ताकि पारदर्शिता बनी रहे। लेकिन प्रेमनगर में स्थिति इसके विपरीत दिखाई देती है। न पूर्ण कार्यों पर सूचना है, न अपूर्ण कार्यों पर और न ही प्रस्तावित कार्यों पर।
ऐसी स्थिति में यह आशंका जताई जा रही है कि कहीं कार्यों में गड़बड़ी या अनियमितता को छिपाने के उद्देश्य से सूचना पटल नहीं लगाए जा रहे। उदाहरण के तौर पर, यदि किसी नाली या सड़क की स्वीकृति 10 मीटर की हो और कार्य कम में पूरा कर दिया जाए, तो बिना सूचना के आम नागरिक को इसकी जानकारी ही नहीं मिल पाएगी। यह मामला सीधे तौर पर नागरिकों के सूचना के अधिकार से जुड़ा हुआ है। जब जनता के पैसे से कार्य हो रहे हैं, तो उन्हें इसकी पूरी जानकारी मिलना उनका अधिकार है।
हमर उत्थान सेवा समिति ने इस मामले को गंभीरता से उठाते हुए नगर पंचायत प्रशासन से जवाब मांगा है। समिति की मांग है कि सभी विकास कार्यों में तत्काल सूचना पटल लगाए जाएं, अब तक हुए कार्यों की विस्तृत सूची सार्वजनिक की जाए और टेंडर प्रक्रिया से जुड़ी पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए टेंडर खोलने की वीडियो रिकॉर्डिंग भी सार्वजनिक की जाए। देखना होगा कि नगर पंचायत प्रशासन इस मुद्दे पर क्या जवाब देता है और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं।