सूरजपुर। जिले में एक बार फिर महिला एवं बाल विकास विभाग की कार्यप्रणाली सवालों के घेरे में है। बाल संरक्षण के नाम पर की जा रही कार्रवाई अब ग्रामीणों के दर्द और आक्रोश का कारण बनती दिख रही है। कुदरगढ़ धाम से जुड़े कुछ परिवारों ने आरोप लगाया है कि उनके छोटे-छोटे बच्चों को बिना ठोस आधार के जबरन ले जाया गया, जिससे पूरे परिवार में भय और असहायता का माहौल बन गया है।

मामला विकासखंड भैयाथान के ग्राम पंचायत बक्सर से जुड़ा है, जहां के ग्रामीणों ने कलेक्टर के नाम जिला पंचायत सीईओ को शिकायत पत्र सौंपते हुए गंभीर आरोप लगाए हैं। शिकायत के अनुसार, 8 अप्रैल 2026 को चाइल्ड लाइन और बाल संरक्षण इकाई के अधिकारियों ने कार्रवाई करते हुए कई बच्चों को अपने साथ ले लिया। इनमें चंद्रशेखर की 6 वर्षीय बेटी के साथ उनके साथी महेंद्र के 11 वर्षीय पुत्री, 9 वर्षीय पुत्र और 7 वर्षीय पुत्री भी शामिल हैं।

आवेदक चंद्रशेखर ने बताया कि वह कुदरगढ़ धाम में श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए गए बकरों को उतारने और मांस तैयार करने का काम करता है, जिससे उसे प्रतिदिन 200 से 300 रुपये की मजदूरी मिलती है। इसी कमाई से वह अपने परिवार का भरण-पोषण करता है। उनका कहना है कि उनके बच्चों को भीख मंगवाने के आरोप में उठाया गया, जबकि उन्होंने इस आरोप को पूरी तरह निराधार बताया है।

ग्रामीणों का आरोप है कि कार्रवाई के दौरान अधिकारियों ने मजदूरों से जबरन पंचनामा और अन्य दस्तावेजों में अंगूठा लगवा लिया, जबकि उन्हें पूरी जानकारी भी नहीं दी गई। 10 अप्रैल को परिजन कलेक्टर कार्यालय पहुंचे, जहां उन्हें बताया गया कि बच्चों को 8 दिन बाद सौंपा जाएगा। इस बीच बच्चों की मांओं का रो-रोकर बुरा हाल है और परिवार मानसिक पीड़ा से गुजर रहा है।

इस घटना ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। क्या बाल संरक्षण इकाई बिना पर्याप्त जांच के कार्रवाई कर रही है? क्या विभाग केवल आंकड़ों और औपचारिकताओं को पूरा करने के लिए ऐसे कदम उठा रहा है? या फिर कहीं जमीनी स्तर पर संवेदनशीलता की कमी है, जिससे मासूम बच्चों और उनके परिवारों को अनावश्यक पीड़ा झेलनी पड़ रही है।