सूरजपुर। जिले के नगर पंचायत प्रेमनगर में करीब 3 करोड़ 14 लाख 70 हजार रुपये के निर्माण कार्यों के टेंडर को लेकर बड़ा विवाद सामने आया है। यह टेंडर 23 फरवरी 2026 को जारी किया गया था, जिसमें ऑनलाइन आवेदन की अंतिम तिथि 15 मार्च 2026 शाम 5 बजे तक निर्धारित थी, जबकि संबंधित दस्तावेजों की हार्ड कॉपी 18 मार्च दोपहर 2 बजे तक नगर पंचायत कार्यालय में पहुंचना अनिवार्य था।

टेंडर प्रक्रिया के तहत हार्ड कॉपी खोलने की तिथि 18 मार्च दोपहर निर्धारित थी तथा ऑनलाइन टेंडर 19 मार्च शाम 3 बजे खोला जाना था। इसी बीच ठेकेदारों ने गंभीर आरोप लगाते हुए बताया कि रामानुजनगर उप डाक केंद्र से भेजे गए टेंडर दस्तावेजों के डाक बैग को इंडियन पोस्ट के असिस्टेंट ब्रांच पोस्ट मास्टर धर्मेंद्र साहू द्वारा बस के माध्यम से लाते समय बीच रास्ते में अपने घर ले जाया गया, जिससे समय पर दस्तावेज नगर पंचायत तक नहीं पहुंच सके।

ठेकेदारों का आरोप है कि यह पूरी प्रक्रिया जानबूझकर प्रभावित करने के उद्देश्य से की गई, ताकि सीमित प्रतिस्पर्धा के बीच किसी एक ठेकेदार को लाभ पहुंचाया जा सके। हालांकि इस संबंध में किसी का नाम खुलकर सामने नहीं आया है, लेकिन दबी जुबान में एक विशेष ठेकेदार को लाभ पहुंचाने की बात कही जा रही है।

मामले ने तूल पकड़ा तो इंडियन पोस्ट रामानुजनगर के पोस्ट मास्टर चंदन स्वयं शाम लगभग 6 बजे अपने निजी वाहन से डाक बैग लेकर नगर पंचायत प्रेमनगर पहुंचे और दस्तावेज जमा कराए। इस दौरान उपस्थित ठेकेदारों ने डाक प्राप्ति की सूची (रिसीविंग रजिस्टर) दिखाने की मांग की, लेकिन पोस्ट मास्टर द्वारा सूची उपलब्ध नहीं कराई गई, जिससे संदेह और गहरा गया।

घटना के समय नगर पंचायत कार्यालय में भारी संख्या में लोग उपस्थित थे, जिनमें भाजपा वरिष्ठ नेता एवं पार्षद वीरेंद्र जायसवाल, एडवोकेट लक्ष्मी साहू, पार्षद राजीव बंसल, ठेकेदार सचिन अग्रवाल, प्रदीप अग्रवाल, प्रदीप यादव सहित अनेक नागरिक मौजूद रहे। साथ ही हमर उत्थान सेवा समिति के अध्यक्ष चंद्र प्रकाश साहू भी मौके पर उपस्थित रहे। इस पूरे घटनाक्रम को लेकर ठेकेदारों और स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश देखा गया और निष्पक्ष जांच की मांग उठने लगी है।

उक्त टेंडर के अंतर्गत नगर पंचायत क्षेत्र के विभिन्न वार्डों में सीसी रोड, पुलिया, रिटेनिंग वॉल, महतारी घाट तथा आंगनबाड़ी निर्माण जैसे कुल कई कार्य शामिल हैं, जिनकी अनुमानित लागत 3 करोड़ 

लाखों से लेकर 60 लाख रुपये से अधिक तक है। पूरे मामले में डाक विभाग और नगर पंचायत की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। यदि आरोप सत्य पाए जाते हैं तो यह न केवल टेंडर प्रक्रिया की पारदर्शिता पर प्रश्नचिन्ह है, बल्कि यह सरकारी तंत्र में मिलीभगत और भ्रष्टाचार की आशंका को भी उजागर करता है। स्थानीय लोगों ने मामले की उच्चस्तरीय जांच कर दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है।