हमर उत्थान सेवा समिति ने की कड़ी निंदा, जिम्मेदार अधिकारियों पर तत्काल कार्रवाई की मांग

सूरजपुर। जिला मुख्यालय सूरजपुर में धान उपार्जन केंद्र सावांरावा में सामने आए भारी गड़बड़ी के मामले में अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं होने से आक्रोश गहराता जा रहा है। कार्यालय कलेक्टर खाद्य शाखा सूरजपुर द्वारा जारी पत्र क्रमांक 204 खाद्य 397 धान उपार्जन 2026 दिनांक 10 फरवरी 2026 में स्पष्ट उल्लेख है कि जांच दल द्वारा भौतिक सत्यापन में भारी मात्रा में धान कम पाया गया, फिर भी आज दिनांक तक न तो प्राथमिकी दर्ज हुई और न ही जिम्मेदार अधिकारियों पर कोई प्रभावी कार्रवाई की गई।

कलेक्टर कार्यालय के आदेश के अनुसार 1 फरवरी 2026 को उपार्जन केंद्र सावांरावा का भौतिक सत्यापन किया गया था। जांच के दौरान समिति प्रबंधक विभु प्रताप सिंह तथा खरीदी प्रभारी रिजवान खान मौके पर अनुपस्थित पाए गए। मोबाइल बंद होने और सूचना के बावजूद शाम 6 बजे तक उपस्थित न होने को गंभीर लापरवाही माना गया। एसडब्ल्यूसी के विशेषज्ञ कर्मचारियों तथा आठ पटवारियों की टीम द्वारा स्टेक की गिनती कर प्रतिवेदन तैयार किया गया।

ऑनलाइन रिपोर्ट के अनुसार केंद्र में 65813.60 क्विंटल धान अर्थात 164534 बोरी उपलब्ध होना चाहिए था, जबकि मौके पर मात्र 32975.60 क्विंटल यानी 82439 बोरी धान ही मिला। इस प्रकार 32838.00 क्विंटल यानी 82095 बोरी धान कम पाया गया। यह अंतर सामान्य त्रुटि नहीं बल्कि बड़े पैमाने पर वित्तीय अनियमितता और संभावित गबन की ओर संकेत करता है।

खाली वारदानों की स्थिति भी संदिग्ध पाई गई। भौतिक सत्यापन में कुल 40750 नग वारदाना उपलब्ध पाए गए जबकि ऑनलाइन रिपोर्ट में 32789 नग शेष दर्शाया गया है। इस अंतर ने भी पूरे मामले को और गंभीर बना दिया है।

जांच के दौरान रजिस्टर और पंजियों का मिलान नहीं हो सका क्योंकि समिति प्रबंधन अनुपस्थित रहा। कलेक्टर ने शाखा प्रबंधक, जिला सहकारी केंद्रीय बैंक मर्यादित सूरजपुर की ओड़गी शाखा को खरीदी प्रभारी रिजवान खान के विरुद्ध प्राथमिक सूचना दर्ज कराने तथा अभिलेख जब्त कर कार्रवाई की सूचना देने के निर्देश दिए थे। लेकिन आदेश जारी होने के कई दिन बाद भी कोई एफआईआर दर्ज नहीं होना प्रशासनिक शिथिलता पर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है।

सामाजिक संगठन हमर उत्थान सेवा समिति ने इस पूरे प्रकरण की कड़ी निंदा करते हुए कहा है कि जब स्वयं कलेक्टर स्तर से प्राथमिक सूचना दर्ज कराने के निर्देश दिए गए हैं तो फिर देरी किस दबाव में हो रही है। समिति ने बैंक शाखा प्रबंधक, संबंधित नोडल अधिकारी, उप पंजीयक सहकारी संस्थाएं, तहसीलदार तथा जांच से जुड़े जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका की निष्पक्ष जांच की मांग की है। समिति का कहना है कि यदि तत्काल एफआईआर दर्ज कर दोषियों को निलंबित नहीं किया गया तो इसे संरक्षण प्राप्त भ्रष्टाचार माना जाएगा।

समिति ने यह भी उल्लेख किया कि पूर्व में उमेश्वरपुर उपार्जन केंद्र में गड़बड़ी पाए जाने पर अपराध दर्ज किया गया था और संबंधितों पर कार्रवाई हुई थी। ऐसे में सावांरावा मामले में चुप्पी दोहरे मापदंड को दर्शाती है। यदि उमेश्वरपुर में एफआईआर हो सकती है तो सावांरावा में क्यों नहीं, यह सवाल अब आम किसानों के बीच भी उठ रहा है।

धान उपार्जन जैसे संवेदनशील विषय में हजारों क्विंटल की कमी सीधे किसानों और शासन की आर्थिक व्यवस्था से जुड़ा मामला है। जिले में यदि इस स्तर पर गड़बड़ी सामने आती है और कार्रवाई नहीं होती तो यह पूरे उपार्जन तंत्र की विश्वसनीयता पर गंभीर आघात है।

हमर उत्थान सेवा समिति ने स्पष्ट किया है कि यदि समयबद्ध कार्रवाई नहीं हुई तो वे उच्च स्तर पर विस्तृत प्रतिवेदन प्रस्तुत करेंगे और विधिक एवं संवैधानिक माध्यमों से न्याय की मांग करेंगे। किसानों की मेहनत और शासन की संपत्ति की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए और इस दिशा में किसी प्रकार की ढिलाई स्वीकार्य नहीं हो सकती।